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mahabharat 3.52.15: विद्वानों ने राज्य को क्षत्रिय का सर्वश्रेष्ठ धर्म माना है। तुम क्षत्रिय धर्म को जानने वाले राजा हो। धर्म के मार्ग से विचलित मत होओ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.52.15 
राज्यमेव परं धर्मं क्षत्रियस्य विदुर्बुधा:।
स क्षत्रधर्मविद् राजा मा धर्म्यान्नीनश: पथ:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
विद्वानों ने राज्य को क्षत्रिय का सर्वश्रेष्ठ धर्म माना है। तुम क्षत्रिय धर्म को जानने वाले राजा हो। धर्म के मार्ग से विचलित मत होओ॥15॥
 
‘The scholars have considered the kingdom to be the best religion of a Kshatriya. You are a king who knows the Kshatriya religion. Do not deviate from the path of religion.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)