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mahabharat 3.52.11: 'हम सब बलवान बाहुओं से संपन्न हैं और भगवान वासुदेव हमारे रक्षक हैं, फिर भी हम आपके लिए अपना क्रोध चुपचाप सहन कर रहे हैं॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.52.11 
ते वयं बाहुबलिन: क्रोधमुत्थितमात्मन:।
सहामहे भवन्मूलं वासुदेवेन पालिता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'हम सब बलवान बाहुओं से संपन्न हैं और भगवान वासुदेव हमारे रक्षक हैं, फिर भी हम आपके लिए अपना क्रोध चुपचाप सहन कर रहे हैं॥ 11॥
 
'We are all blessed with strong arms and Lord Vasudeva is our protector, yet we quietly endure our anger for your sake.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)