श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.51.40 
परिक्लिष्टासि यैस्तत्र यैश्चासि समुपेक्षिता।
तेषामुत्कृत्तशिरसां भूमि: पास्यति शोणितम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
'यह धरती उन सभी लोगों के कटे हुए सिरों का खून पीएगी, जिन्होंने सभा में तुम्हें पीड़ा पहुंचाई और जो चुप रहे तथा अन्याय को नजरअंदाज किया।'
 
'This earth will drink the blood from the severed heads of all those who caused you pain in the assembly and those who remained silent and ignored the injustice.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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