श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.51.4 
तेषामसह्यवीर्याणां शौर्यं धैर्यं धृतिं पराम्।
अन्योन्यमनुरागं च भ्रातॄणामतिमानुषम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैं देख रहा हूँ कि पाण्डवों का पराक्रम असह्य है। उनमें साहस, धैर्य और उत्तम एकाग्रता है। इन सभी भाइयों में परस्पर असाधारण प्रेम है॥4॥
 
‘I see that the might of the Pandavas is unbearable. They have courage, patience and excellent concentration. All these brothers have extraordinary love for each other.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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