श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.51.39 
तेषां द्रक्ष्यसि पाञ्चालि गात्राणि पृथिवीतले।
क्रव्यादै: कृष्यमाणानि भक्ष्यमाणानि चासकृत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
‘पांचाल की राजकुमारी! तुम देखोगे कि उन दुष्टों के शरीरों को इस पृथ्वी पर गीदड़, गिद्ध आदि मांसाहारी पशु और पक्षी बार-बार घसीटकर खा रहे हैं॥ 39॥
 
‘Princess of Panchala! You will see that the bodies of those wicked people are being dragged and eaten again and again on this earth by carnivorous animals and birds like jackals, vultures, etc.॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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