श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.51.16 
श्रुत्वा हि निर्जितान् द्यूते पाण्डवान् मधुसूदन:।
त्वरित: काम्यके पार्थान् समभावयदच्युत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भगवान मधुसूदन ने ज्यों ही सुना कि पाण्डव जुए में हार गए हैं, त्यों ही वे काम्यक वन में गए और कुन्तीपुत्रों से मिलकर उन्हें आश्वासन दिया॥16॥
 
As soon as Lord Madhusudana heard that the Pandavas had been defeated in the game of gambling, he went to Kamyaka forest, met the sons of Kunti and assured them.॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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