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mahabharat 3.51.14: उस समय दुर्योधन के वश में होकर मैं अपने हितैषी मित्रों की उन आज्ञाओं को स्मरण करूँगा जिनका मैंने पहले पालन नहीं किया था।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.51.14 
ततोऽहं सुहृदां वाचो दुर्योधनवशानुग:।
स्मरणीया: स्मरिष्यामि मया या न कृता: पुरा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय दुर्योधन के वश में होकर मैं अपने हितैषी मित्रों की उन आज्ञाओं को स्मरण करूँगा जिनका मैंने पहले पालन नहीं किया था।॥14॥
 
'At that time, being under the control of Duryodhan, I shall recall the instructions of my well-wishing friends which I had not followed earlier.'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)