श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.51.12-13 
तेषां मध्ये महेष्वासो भीमो भीमपराक्रम:।
शैक्यया वीरघातिन्या गदया विचरिष्यति॥ १२॥
तथा गाण्डीवनिर्घोषं विस्फूर्जितमिवाशने:।
गदावेगं च भीमस्य नालं सोढुं नराधिपा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब उनके बीच में भयंकर पराक्रमी भीमसेन अपनी गदा को आकाश में उठाकर बड़े-बड़े योद्धाओं को मार डालने में समर्थ होंगे, तब कोई भी राजा भीमसेन की गदा के बल का तथा वज्र के समान गाण्डीव धनुष की टंकार का सामना नहीं कर सकेगा॥12-13॥
 
'When amongst them the terrifyingly powerful and mighty Bhimasena will roam about with his mace raised high in the sky, capable of killing great warriors, then no king will be able to withstand the force of Bhima's mace or the twang of the Gandiva bow, which is like thunder.॥ 12-13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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