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mahabharat 3.50.12: इस प्रकार पाण्डवों को अर्जुन से अलग होकर काम्यकवन में उसकी लालसा से रहते हुए पाँच वर्ष बीत गये। इतने समय तक उनका स्वाध्याय, जप और गृहस्थाश्रम सदैव पूर्ववत् चलता रहा। 12॥   |   mahabharat अध्याय 3.50: वनमें पाण्डवोंका आहार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 50: वनमें पाण्डवोंका आहार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.50.12 
तथा तेषां वसतां काम्यके वै
विहीनानामर्जुनेनोत्सुकानाम्।
पञ्चैव वर्षाणि तथा व्यतीयु-
रधीयतां जपतां जुह्वतां च॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पाण्डवों को अर्जुन से अलग होकर काम्यकवन में उसकी लालसा से रहते हुए पाँच वर्ष बीत गये। इतने समय तक उनका स्वाध्याय, जप और गृहस्थाश्रम सदैव पूर्ववत् चलता रहा। 12॥
 
In this way, five years passed for the Pandavas, separated from Arjun and living in Kamyakavana with longing for him. For so long his self-study, chanting and home always continued as before. 12॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि इन्द्रलोकाभिगमनपर्वणि पार्थाहारकथने पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत इन्द्रलोकाभिगमनपर्वमें पाण्डवोंके भोजनका वर्णनविषयक पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)