श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 50: वनमें पाण्डवोंका आहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.50.1 
जनमेजय उवाच
यदिदं शोचितं राज्ञा धृतराष्ट्रेण वै मुने।
प्रव्राज्य पाण्डवान् वीरान् सर्वमेतन्निरर्थकम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय बोले - मुनिवर! वीर पाण्डवों को वन में निर्वासित करने पर राजा धृतराष्ट्र को जो महान शोक हुआ, वह सब व्यर्थ गया।
 
Janamejaya said - Sage! The great grief which King Dhritarashtra felt after banishing the valiant Pandavas to the forest was all in vain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)