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श्लोक 3.5.8  |
कच्चिन्नायं वचनात् सौबलस्य
समाह्वाता देवनायोपयात:।
कच्चित् क्षुद्र: शकुनिर्नायुधानि
जेष्यत्यस्मान् पुनरेवाक्षवत्याम्॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| क्या वे शकुनि के कहने पर हमें फिर से जुआ खेलने के लिए बुलाने आ रहे हैं? क्या नीच शकुनि हमें फिर से जुआघर में बुलाकर हमारे हथियार चुरा लेगा? 8. |
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| ‘Are they coming to call us to gamble again at the behest of Shakuni? Will the vile Shakuni call us to the gambling hall again and steal our weapons? 8. |
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