श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 5: पाण्डवोंका काम्यकवनमें प्रवेश और विदुरजीका वहाँ जाकर उनसे मिलना और बातचीत करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.5.8 
कच्चिन्नायं वचनात् सौबलस्य
समाह्वाता देवनायोपयात:।
कच्चित् क्षुद्र: शकुनिर्नायुधानि
जेष्यत्यस्मान् पुनरेवाक्षवत्याम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
क्या वे शकुनि के कहने पर हमें फिर से जुआ खेलने के लिए बुलाने आ रहे हैं? क्या नीच शकुनि हमें फिर से जुआघर में बुलाकर हमारे हथियार चुरा लेगा? 8.
 
‘Are they coming to call us to gamble again at the behest of Shakuni? Will the vile Shakuni call us to the gambling hall again and steal our weapons? 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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