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श्लोक 3.49.8  |
महेश्वरेण यो राजन्न जीर्णो ह्यष्टमूर्तिना।
कस्तमुत्सहते वीरो युद्धे जरयितुं पुमान्॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! अष्टमूर्ति भगवान महेश्वर भी जिन्हें युद्ध में नहीं हरा सके, उन वीर अर्जुन को परास्त करने का साहस दूसरा कौन वीर कर सकता है?॥8॥ |
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| Rajan! Ashtamurti* Whom even Lord Maheshwar could not defeat in battle, which other brave man can dare to defeat the brave Arjuna? 8॥ |
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