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श्लोक 3.49.23  |
सर्वथा न हि मे पुत्रा: सहामात्या: ससौबला:।
क्रुद्धे पार्थे च भीमे च वासुदेवे च सात्वते॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| जब कुन्तीपुत्र अर्जुन, भीमसेन और यदुकुलतिलक वसुदेव श्रीकृष्ण क्रोध से भर जाएँ, तब मुझे विश्वास करना चाहिए कि शकुनि आदि मन्त्रियों सहित मेरे सभी पुत्र पूर्णतः जीवित नहीं रह सकते॥23॥ |
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| When Kunti's son Arjuna, Bhimsen and Yadukulatilaka Vasudeva Shri Krishna are filled with anger, then I should believe that all my sons including Shakuni and other ministers cannot survive completely. 23॥ |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि इन्द्रलोकाभिगमनपर्वणि धृतराष्ट्रखेदे एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत इन्द्रलोकाभिगमनपर्वमें धृतराष्ट्रखेदविषयक उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४९॥
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