मन्युना हि समाविष्टा: पाण्डवास्ते महौजस:।
दृष्ट्वा कृष्णां सभां नीतां धर्मपत्नीं यशस्विनीम्॥ २॥
दु:शासनस्य ता वाच: श्रुत्वा ते दारुणोदया:।
कर्णस्य च महाराज जुगुप्सन्तीति मे मति:॥ ३॥
अनुवाद
वे पराक्रमी पाण्डव अपनी पत्नी, तेजस्वी श्रीकृष्ण को दरबार में लाए हुए देखकर क्रोध से भर गए हैं। और हे राजन! दु:शासन और कर्ण के वे कठोर वचन सुनकर मुझे विश्वास हो गया है कि पाण्डव आपकी निन्दा कर रहे हैं। ॥2-3॥
Those mighty Pandavas are filled with anger on seeing their wife, the glorious Krishna, brought to the court. And O King! On hearing those harsh words of Dushasan and Karna, I am sure that the Pandavas are criticising you. ॥2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)