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श्लोक 3.49.17  |
ये चास्य सचिवा मन्दा: कर्णसौबलकादय:।
ते तस्य भूयसो दोषान् वर्धयन्ति विचेतस:॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| कर्ण और शकुनि जैसे उसके मूर्ख मंत्री बिना विचारे ही उसके दोषों को यथासम्भव बढ़ाने का ही प्रयत्न करते हैं॥17॥ |
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| His foolish ministers like Karna and Shakuni, without any thought, only try to increase his faults as much as possible.॥ 17॥ |
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