vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 49: संजयके द्वारा धृतराष्ट्रकी बातोंका अनुमोदन और धृतराष्ट्रका संताप
»
श्लोक 16
श्लोक
3.49.16
ममापि वचनं सूत न शुश्रूषति मन्दभाक्।
दृष्ट्वा मां चक्षुषा हीनं निर्विचेष्टमचेतसम्॥ १६॥
अनुवाद
सूत! वह अभागा दुर्योधन मुझे अन्धा, अकर्मण्य और विवेकहीन समझकर मेरी बात सुनना भी नहीं चाहता ॥16॥
Suta! That unfortunate Duryodhana does not even want to listen to me, considering me blind, inactive and indiscreet. ॥ 16॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas