vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 49: संजयके द्वारा धृतराष्ट्रकी बातोंका अनुमोदन और धृतराष्ट्रका संताप
»
श्लोक 10
श्लोक
3.49.10
यत् तु प्रस्फुरमाणौष्ठो भीम: प्राह वचोऽर्थवत्।
दृष्ट्वा दुर्योधनेनोरू द्रौपद्या दर्शितावुभौ॥ १०॥
अनुवाद
जब दुर्योधन ने द्रौपदी को अपनी जंघाएँ दिखाईं, तब भीमसेन ने यह देखकर काँपते हुए होठों से जो कहा था, वह व्यर्थ नहीं हो सकता था।
When Duryodhana had shown Draupadi his thighs, what Bhimasena had said with trembling lips on seeing this could not be in vain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×