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mahabharat 3.49.10: जब दुर्योधन ने द्रौपदी को अपनी जंघाएँ दिखाईं, तब भीमसेन ने यह देखकर काँपते हुए होठों से जो कहा था, वह व्यर्थ नहीं हो सकता था।   |   mahabharat अध्याय 3.49: संजयके द्वारा धृतराष्ट्रकी बातोंका अनुमोदन और धृतराष्ट्रका संताप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 49: संजयके द्वारा धृतराष्ट्रकी बातोंका अनुमोदन और धृतराष्ट्रका संताप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.49.10 
यत् तु प्रस्फुरमाणौष्ठो भीम: प्राह वचोऽर्थवत्।
दृष्ट्वा दुर्योधनेनोरू द्रौपद्या दर्शितावुभौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब दुर्योधन ने द्रौपदी को अपनी जंघाएँ दिखाईं, तब भीमसेन ने यह देखकर काँपते हुए होठों से जो कहा था, वह व्यर्थ नहीं हो सकता था।
 
When Duryodhana had shown Draupadi his thighs, what Bhimasena had said with trembling lips on seeing this could not be in vain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)