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mahabharat 3.48.4: मेरा मूर्ख पुत्र सांसारिक सुखों में उलझा हुआ है। उसके विचार सदैव पापों से भरे रहते हैं। प्रमाद में फँसा हुआ वह अत्यंत मूर्ख दुर्योधन एक दिन सम्पूर्ण जगत का नाश कर देगा ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.48: दु:खित धृतराष्ट्रका संजयके सम्मुख अपने पुत्रोंके लिये चिन्ता करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 48: दु:खित धृतराष्ट्रका संजयके सम्मुख अपने पुत्रोंके लिये चिन्ता करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.48.4 
प्रमत्तो ग्राम्यधर्मेषु मन्दात्मा पापनिश्चय:।
मम पुत्र: सुदुर्बुद्धि: पृथिवीं घातयिष्यति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मेरा मूर्ख पुत्र सांसारिक सुखों में उलझा हुआ है। उसके विचार सदैव पापों से भरे रहते हैं। प्रमाद में फँसा हुआ वह अत्यंत मूर्ख दुर्योधन एक दिन सम्पूर्ण जगत का नाश कर देगा ॥4॥
 
My foolish son is entangled in worldly pleasures. His thoughts are always full of sins. That extremely foolish Duryodhan who is caught in negligence will one day destroy the whole world. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)