vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 48: दु:खित धृतराष्ट्रका संजयके सम्मुख अपने पुत्रोंके लिये चिन्ता करना
»
श्लोक 17
श्लोक
3.48.17
अपि तद्रथघोषेण भयार्ता सव्यसाचिन:।
प्रतिभाति विदीर्णेव सर्वतो भारती चमू:॥ १७॥
अनुवाद
आज भी मैं सव्यसाची अर्जुन के रथ की गड़गड़ाहट से समस्त कौरव सेना को भयभीत और टुकड़े-टुकड़े होते हुए देख सकता हूँ।
Even today I can see the entire Kaurava army being frightened and torn to pieces by the rumbling sound of Savyasachi Arjun's chariot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×