श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 48: दु:खित धृतराष्ट्रका संजयके सम्मुख अपने पुत्रोंके लिये चिन्ता करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.48.16 
यथा हि किरणा भानोस्तपन्तीह चराचरम्।
तथा पार्थभुजोत्सृष्टा: शरास्तप्यन्ति मत्सुतान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जैसे सूर्य की किरणें जड़-चेतन जगत को पीड़ित करती हैं, वैसे ही अर्जुन की भुजाओं से छूटे हुए बाण मेरे पुत्रों को पीड़ित करेंगे॥ 16॥
 
Just as the rays of the Sun torment the animate and inanimate world, similarly the arrows shot by Arjun's arms will torment my sons.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)