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mahabharat 3.47.7: 'ब्रह्मर्षि! मैं तुम्हारे मन में उठे प्रश्न का उत्तर देता हूँ। सुनो। अर्जुन कोई नश्वर प्राणी नहीं है जो मनुष्य योनि में जन्म लेता है।'   |   mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.47.7 
ब्रह्मर्षे श्रूयतां यत् ते मनसैतद् विवक्षितम्।
नायं केवलमर्त्यो वै मानुषत्वमुपागत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'ब्रह्मर्षि! मैं तुम्हारे मन में उठे प्रश्न का उत्तर देता हूँ। सुनो। अर्जुन कोई नश्वर प्राणी नहीं है जो मनुष्य योनि में जन्म लेता है।'
 
'Brahmarshi! I am going to answer the question that has arisen in your mind. Listen. Arjuna is not a mortal being born as a human being. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)