Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.47.5: उसके कौन-से पुण्यकर्म हैं? उसने कौन-से लोकों पर विजय प्राप्त की है? किस पुण्य के प्रभाव से उसे देवताओं में यह पूजनीय स्थान प्राप्त हुआ है?॥5॥ | mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं त्वस्य सुकृतं कर्म के लोका वै विनिर्जिता:।
स एवमनुसम्प्राप्त: स्थानं देवनमस्कृतम्॥ ५॥
अनुवाद
उसके कौन-से पुण्यकर्म हैं? उसने कौन-से लोकों पर विजय प्राप्त की है? किस पुण्य के प्रभाव से उसे देवताओं में यह पूजनीय स्थान प्राप्त हुआ है?॥5॥
‘What are his pious deeds? Which worlds has he conquered? Due to the influence of which virtue has he achieved this place of worship among the gods?’॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥