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वहाँ पहुँचकर उन्होंने शत्रु-विनाशक कुन्तीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर को अपने भाइयों और तपस्वी ऋषियों से घिरे हुए देखा।
Reaching there he saw the enemy-destroyer, Kunti's son Dharmaraja Yudhishthira surrounded by his brothers and ascetic sages.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि इन्द्रलोकाभिगमनपर्वणि लोमशगमने सप्तचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत इन्द्रलोकाभिगमनपर्वमें लोमशगमनविषयक सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥