श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.47.32 
एवमुक्तो महेन्द्रेण बीभत्सुरपि लोमशम्।
उवाच प्रयतो वाक्यं रक्षेथा: पाण्डुनन्दनम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महेन्द्र के ऐसा कहने पर अर्जुन ने भी विनीत भाव से लोमश मुनि से कहा - 'मुने! पाण्डु नन्दन, भाइयों सहित युधिष्ठिर की रक्षा कीजिए॥32॥
 
When Mahendra said this, Arjun also politely said to Lomash Muni - 'Mune! Pandu Nandan, protect Yudhishthira along with his brothers. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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