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mahabharat 3.47.31: 'पहाड़ों के दुर्गम स्थानों में तथा ऊँचे-नीचे स्थानों में भयंकर राक्षस रहते हैं; उनसे तुम अपने भाइयों सहित युधिष्ठिर की रक्षा करो।'॥31॥   |   mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.47.31 
गिरिदुर्गेषु च सदा देशेषु विषमेषु च।
वसन्ति राक्षसा रौद्रास्तेभ्यो रक्षां विधास्यति॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
'पहाड़ों के दुर्गम स्थानों में तथा ऊँचे-नीचे स्थानों में भयंकर राक्षस रहते हैं; उनसे तुम अपने भाइयों सहित युधिष्ठिर की रक्षा करो।'॥31॥
 
'In the inaccessible places of the mountains and in the high and low lands live fierce demons; you must protect Yudhishthira along with your brothers from them.'॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)