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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.47.30 
भवांश्चैनं द्विजश्रेष्ठ पर्यटन्तं महीतलम्।
त्रातुमर्हति विप्राग्रॺ तपोबलसमन्वित:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! आप भी पृथ्वी पर विचरण करने वाले राजा युधिष्ठिर की रक्षा करें, क्योंकि आप आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न हैं।
 
'O best of the Brahmins! You too should protect King Yudhishthira who roams on the earth, because you are blessed with spiritual power.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)