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mahabharat 3.47.27: महाबाहु अर्जुन ने शस्त्रविद्या की पूर्ण शिक्षा प्राप्त कर ली है। वह नृत्य, वाद्य और गान आदि दिव्य कलाओं में भी निपुण हो गया है।॥27॥   |   mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.47.27 
गृहीतास्त्रो गुडाकेशो महाबाहुर्महामना:।
नृत्यवादित्रगीतानां दिव्यानां पारमीयिवान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु अर्जुन ने शस्त्रविद्या की पूर्ण शिक्षा प्राप्त कर ली है। वह नृत्य, वाद्य और गान आदि दिव्य कलाओं में भी निपुण हो गया है।॥27॥
 
‘The great-armed Arjuna has received complete training in the art of weaponry. He has also become proficient in the divine arts of dance, musical instruments and song.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)