Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.47.25: वह बड़ा ही धर्मात्मा और सत्यवादी है। कृपया उसे मेरा संदेश दीजिए - 'हे राजन! अर्जुन के लौटने की चिन्ता मत कीजिए। वह शस्त्रविद्या सीखकर शीघ्र ही लौट आएगा।'॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.47.25 
स वाच्यो मम संदेशाद् धर्मात्मा सत्यसंगर:।
नोत्कण्ठा फाल्गुने कार्या कृतास्त्र: शीघ्रमेष्यति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वह बड़ा ही धर्मात्मा और सत्यवादी है। कृपया उसे मेरा संदेश दीजिए - 'हे राजन! अर्जुन के लौटने की चिन्ता मत कीजिए। वह शस्त्रविद्या सीखकर शीघ्र ही लौट आएगा।'॥ 25॥
 
'He is a very pious person and truthful. Please give him my message-'O King! Do not be anxious about Arjuna's return. He will return soon after learning the art of weapons.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)