श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.47.24 
भवानस्मन्नियोगेन यातु तावन्महीतलम्।
काम्यके द्रक्ष्यसे वीरं निवसन्तं युधिष्ठिरम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘मुनि! मेरी प्रार्थना से आप पृथ्वी पर जाकर काम्यक वन में रहने वाले युधिष्ठिर से मिलिए।॥ 24॥
 
‘Muni! On my request, please go to the earth and meet Yudhishthira who lives in Kamyaka forest.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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