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mahabharat 3.47.20: 'हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! भगवान श्रीहरि हमारा महान कार्य सिद्ध कर सकते हैं। हमारा कार्य कुन्तीपुत्र अर्जुन के माध्यम से भी सिद्ध हो सकता है। यदि श्रीकृष्ण और अर्जुन किसी महायुद्ध में एक-दूसरे से मिल जाएँ, तो वे मिलकर महानतम कार्य सिद्ध कर सकते हैं।' इसमें कोई संदेह नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.47.20 
तेन कार्यं महत् कार्यमस्माकं द्विजसत्तम।
पार्थेन च महायुद्धे समेताभ्यां न संशय:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! भगवान श्रीहरि हमारा महान कार्य सिद्ध कर सकते हैं। हमारा कार्य कुन्तीपुत्र अर्जुन के माध्यम से भी सिद्ध हो सकता है। यदि श्रीकृष्ण और अर्जुन किसी महायुद्ध में एक-दूसरे से मिल जाएँ, तो वे मिलकर महानतम कार्य सिद्ध कर सकते हैं।' इसमें कोई संदेह नहीं है।
 
‘O best of the Brahmins! Lord Shri Hari can accomplish our great task. Our task can be accomplished through Kunti's son Arjuna also. If Shri Krishna and Arjuna meet each other in a great war, then together they can accomplish the greatest of tasks.' There is no doubt in this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)