vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना
»
श्लोक 19
श्लोक
3.47.19
येन पूर्वं महात्मान: खनमाना रसातलम्।
दर्शनादेव निहता: सगरस्यात्मजा विभो॥ १९॥
अनुवाद
'महर्षि! प्राचीन काल में रसातल खोदने वाले महाबली सगर पुत्र कपिल के दर्शन मात्र से ही भस्म हो गए थे॥19॥
'Maharshe! In ancient times, the great son of Sagar, who dug the abyss, was burnt to ashes by the mere sight of Kapil. 19॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas