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mahabharat 3.47.19: 'महर्षि! प्राचीन काल में रसातल खोदने वाले महाबली सगर पुत्र कपिल के दर्शन मात्र से ही भस्म हो गए थे॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.47.19 
येन पूर्वं महात्मान: खनमाना रसातलम्।
दर्शनादेव निहता: सगरस्यात्मजा विभो॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'महर्षि! प्राचीन काल में रसातल खोदने वाले महाबली सगर पुत्र कपिल के दर्शन मात्र से ही भस्म हो गए थे॥19॥
 
'Maharshe! In ancient times, the great son of Sagar, who dug the abyss, was burnt to ashes by the mere sight of Kapil. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)