Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.47.17-18: वह महाबली एवं भयंकर दैत्य पाताल में रहता है। समस्त देवता मिलकर भी उससे युद्ध नहीं कर सकते। इस समय पृथ्वी पर जो अवतरित हुए हैं, वे श्रीमन मधुसूदन विष्णु हैं, जो कपिल नाम से प्रसिद्ध देवता हैं। वे अपराजित भगवान हरि हैं।॥17-18॥ | mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पातालवासिनो रौद्रा दनो: पुत्रा महाबला:।
सर्वदेवनिकाया हि नालं योधयितुं हि तान्॥ १७॥
योऽसौ भूमिगत: श्रीमान् विष्णुर्मधुनिषूदन:।
कपिलो नाम देवोऽसौ भगवानजितो हरि:॥ १८॥
अनुवाद
वह महाबली एवं भयंकर दैत्य पाताल में रहता है। समस्त देवता मिलकर भी उससे युद्ध नहीं कर सकते। इस समय पृथ्वी पर जो अवतरित हुए हैं, वे श्रीमन मधुसूदन विष्णु हैं, जो कपिल नाम से प्रसिद्ध देवता हैं। वे अपराजित भगवान हरि हैं।॥17-18॥
‘That mighty and fearsome demon lives in the netherworld. Even all the gods together cannot fight with him. At present, the one who has incarnated on the earth is Shriman Madhusudan Vishnu, the famous deity known as Kapil. He is the undefeated Lord Hari.॥17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥