श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.47.14 
तौ मन्नियोगाद् ब्रह्मर्षे क्षितौ जातौ महाद्युती।
भूमेर्भारावतरणं महावीर्यौ करिष्यत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षि! ये दो महाबली नर और नारायण मेरी ही प्रार्थना से पृथ्वी पर उत्पन्न हुए हैं। इनका बल महान है; ये दोनों इस पृथ्वी का भार हरेंगे।॥14॥
 
‘Brahmarshi! These two very powerful men, Nara and Narayana, have been born on earth at my request. Their power is great; these two will relieve the burden of this earth.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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