Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.47.1-2: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! एक समय महर्षि लोमश भ्रमण करते हुए इन्द्र से मिलने की इच्छा से स्वर्गलोक गये। उन महर्षि ने देवराज इन्द्र से मिलकर उन्हें नमस्कार किया और देखा कि पाण्डवपुत्र अर्जुन इन्द्र के सिंहासन के आधे भाग पर विराजमान हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 47: लोमश मुनिका स्वर्गमें इन्द्र और अर्जुनसे मिलकर उनका संदेश ले काम्यकवनमें आना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  3.47.1-2 
वैशम्पायन उवाच
कदाचिदटमानस्तु महर्षिरुत लोमश:।
जगाम शक्रभवनं पुरन्दरदिदृक्षया॥ १॥
स समेत्य नमस्कृत्य देवराजं महामुनि:।
ददर्शार्धासनगतं पाण्डवं वासवस्य हि॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! एक समय महर्षि लोमश भ्रमण करते हुए इन्द्र से मिलने की इच्छा से स्वर्गलोक गये। उन महर्षि ने देवराज इन्द्र से मिलकर उन्हें नमस्कार किया और देखा कि पाण्डवपुत्र अर्जुन इन्द्र के सिंहासन के आधे भाग पर विराजमान हैं।
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Once upon a time, Maharishi Lomash went to heaven with the desire to meet Indra while roaming around. That great sage met Devraj Indra and greeted him and saw that Pandava's son Arjun was sitting on half of Indra's throne.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)