Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.46.60: इंद्र के ऐसा कहने पर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अर्जुन अत्यंत प्रसन्न हुए और फिर उन्हें शाप की चिंता नहीं रही।   |   mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.46.60 
एवमुक्तस्तु शक्रेण फाल्गुन: परवीरहा।
मुदं परमिकां लेभे न च शापं व्यचिन्तयत्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
इंद्र के ऐसा कहने पर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अर्जुन अत्यंत प्रसन्न हुए और फिर उन्हें शाप की चिंता नहीं रही।
 
Arjuna, the slayer of enemy warriors, was very pleased when Indra said this. Then he was no longer worried about the curse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)