vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना
»
श्लोक 59
श्लोक
3.46.59
तेन नर्तनवेषेण अपुंस्त्वेन तथैव च।
वर्षमेकं विहृत्यैव तत: पुंस्त्वमवाप्स्यसि॥ ५९॥
अनुवाद
एक वर्ष तक अपनी इच्छानुसार विचरण करने, नर्तकी का वेश धारण करने तथा नपुंसक जैसा आचरण करने के पश्चात् तुम पुनः पुरुषत्व प्राप्त कर लोगे ॥59॥
"After roaming around as you please, wearing the garb of a dancer and behaving like an eunuch for one year, you will regain your manhood." ॥ 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×