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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.46.51 
एवं दत्त्वार्जुने शापं स्फुरदोष्ठी श्वसन्त्यथ।
पुन: प्रत्यागता क्षिप्रमुर्वशी गृहमात्मन:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कांपते हुए होठों से शाप देकर उर्वशी गहरी सांस लेती हुई शीघ्रता से अपने घर लौट गई।
 
Having thus cursed with quivering lips, Urvashi quickly returned to her home, taking deep breaths.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)