Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.46.5: सायंकाल के समय जब चंद्रमा उदय हुआ और चारों ओर चांदनी फैल गई, तब विशाल नितंबों वाली वह अप्सरा अपने महल से निकलकर अर्जुन के निवास की ओर चली॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.46.5 
निर्गम्य चन्द्रोदयने विगाढे रजनीमुखे।
प्रस्थिता सा पृथुश्रोणी पार्थस्य भवनं प्रति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सायंकाल के समय जब चंद्रमा उदय हुआ और चारों ओर चांदनी फैल गई, तब विशाल नितंबों वाली वह अप्सरा अपने महल से निकलकर अर्जुन के निवास की ओर चली॥5॥
 
In the evening, when the moon rose and the moonlight was spread all around, that Apsara with huge buttocks left her palace and went towards Arjun's residence. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)