श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.46.48 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्ता तु पार्थेन उर्वशी क्रोधमूर्च्छिता।
वेपन्ती भ्रुकुटीवक्रा शशापाथ धनंजयम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! कुन्तीपुत्र अर्जुन के ऐसा कहने पर उर्वशी क्रोधित हो उठी। उसका शरीर काँपने लगा और उसकी भौंहें टेढ़ी हो गईं। उसने अर्जुन को शाप देते हुए कहा, "हे जनमेजय! हे ...
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Urvashi became furious when Arjuna, the son of Kunti, said this. Her body started trembling and her eyebrows became crooked. She cursed Arjuna and said.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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