श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.46.45 
अर्जुन उवाच
शृणु सत्यं वरारोहे यत् त्वां वक्ष्याम्यनिन्दिते।
शृण्वन्तु मे दिशश्चैव विदिशश्च सदेवता:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले- वररोहे! अनिंदिते! मैं जो कुछ तुमसे कहता हूँ, उसे तुम मेरे सत्य वचनों को सुनो। ये दिशाएँ, विदिशा और उनकी अधिष्ठात्री देवियाँ भी उसे सुनो। ॥ 45॥
 
Arjun said- Vararohe! Anindite! Whatever I tell you, listen to my true words. Let these directions, Vidisha and their presiding goddesses also listen to it. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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