Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.46.40-41: 'यह जानकर कि यह आनंदमयी उर्वशी पुरुवंश की माता है, मेरे नेत्र सजल हो गए और इसी श्रद्धाभाव से मैंने तुम्हें वहाँ देखा। हे शुभ अप्सरा! तुम मुझे अन्य किसी प्रकार से मत समझो। तुम मेरे वंश को बढ़ाने वाली हो, अतः तुम गुरु से भी अधिक महिमावान हो।'॥40-41॥ | mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'यह जानकर कि यह आनंदमयी उर्वशी पुरुवंश की माता है, मेरे नेत्र सजल हो गए और इसी श्रद्धाभाव से मैंने तुम्हें वहाँ देखा। हे शुभ अप्सरा! तुम मुझे अन्य किसी प्रकार से मत समझो। तुम मेरे वंश को बढ़ाने वाली हो, अतः तुम गुरु से भी अधिक महिमावान हो।'॥40-41॥
'My eyes lit up on realizing that this blissful Urvashi is the mother of the Puru dynasty and with this reverential feeling I saw you there. O auspicious Apsara! Do not think of me in any other way. You are going to increase my dynasty and hence you are more glorious than even the Guru.'॥ 40-41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥