श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.46.39 
यच्चेक्षितासि विस्पष्टं विशेषेण मया शुभे।
तच्च कारणपूर्वं हि शृणु सत्यं शुचिस्मिते॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'शुभ! हे निर्मल मुस्कान वाली उर्वशी! उस समय सभा में मैंने तुम्हें जो देखा था, उसका एक विशेष कारण था। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ। मेरी बात सुनो -॥39॥
 
'Shubh! O Urvashi with a pure smile! There was a special reason why I gazed at you in the assembly at that time. I am telling you the truth. Listen to me -॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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