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श्लोक 3.46.38  |
यथा कुन्ती महाभागा यथेन्द्राणी शची मम।
तथा त्वमपि कल्याणि नात्र कार्या विचारणा॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| 'कल्याणी! तुम भी मेरे लिए महाभागा कुन्ती और इन्द्राणी शची के समान हो। इस विषय में अन्य कोई विचार नहीं करना चाहिए। 38॥ |
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| 'Kalyani! You are also like Mahabhaga Kunti and Indrani Sachi for me. There should be no other thought in this matter. 38॥ |
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