श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.46.37 
दु:श्रुतं मेऽस्तु सुभगे यन्मां वदसि भाविनि।
गुरुदारै: समाना मे निश्चयेन वरानने॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'शुभकामनाएँ! भाविनी! तुम्हारी बातें सुनकर भी मुझे बड़ा दुःख हो रहा है। वरान्ने! निश्चय ही तुम मेरी दृष्टि में गुरुपत्नियों के समान पूजनीय हो। 37॥
 
'Good luck! Bhavini! It is very sad for me to even hear what you are saying. Varanne! Certainly, in my eyes you are as revered as Guru's wives. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)