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श्लोक 3.46.31  |
तत: शक्रेण संदिष्टश्चित्रसेनो ममान्तिकम्।
प्राप्त: कमलपत्राक्ष स च मामब्रवीदथ॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| कमलनयन! तदनन्तर गन्धर्व प्रवर चित्रसेन देवराज इन्द्र का सन्देश लेकर मेरे पास आये और इस प्रकार बोले-॥ 31॥ |
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| Kamalnayan! Thereafter Gandharva Pravara Chitrasen came to me with the message of Devraj Indra and said thus -॥ 31॥ |
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