श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.46.31 
तत: शक्रेण संदिष्टश्चित्रसेनो ममान्तिकम्।
प्राप्त: कमलपत्राक्ष स च मामब्रवीदथ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कमलनयन! तदनन्तर गन्धर्व प्रवर चित्रसेन देवराज इन्द्र का सन्देश लेकर मेरे पास आये और इस प्रकार बोले-॥ 31॥
 
Kamalnayan! Thereafter Gandharva Pravara Chitrasen came to me with the message of Devraj Indra and said thus -॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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