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mahabharat 3.46.29-30: जब देवताओं की सभा में वह उत्सव समाप्त हो गया, तब सभी देवता आपके पिता से आज्ञा लेकर अपने-अपने धाम को चले गए। हे शत्रुओं का नाश करने वाले! इसी प्रकार आपके पिता से विदा लेकर सभी प्रमुख अप्सराएँ तथा अन्य साधारण अप्सराएँ भी अपने-अपने धाम को चली गईं।   |   mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  3.46.29-30 
तत्र चावभृथे तस्मिन्नुपस्थाने दिवौकसाम्।
तव पित्राभ्यनुज्ञाता गता: स्वं स्वं गृहं सुरा:॥ २९॥
तथैवाप्सरस: सर्वा विशिष्टा: स्वगृहं गता:।
अपि चान्याश्च शत्रुघ्न तव पित्रा विसर्जिता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब देवताओं की सभा में वह उत्सव समाप्त हो गया, तब सभी देवता आपके पिता से आज्ञा लेकर अपने-अपने धाम को चले गए। हे शत्रुओं का नाश करने वाले! इसी प्रकार आपके पिता से विदा लेकर सभी प्रमुख अप्सराएँ तथा अन्य साधारण अप्सराएँ भी अपने-अपने धाम को चली गईं।
 
When that festival ended in the assembly of gods, all the gods took your father's permission and went to their respective abodes. O destroyer of enemies! In the same way, after taking leave from your father, all the prominent Apsaras and other ordinary Apsaras also went to their respective homes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)