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श्लोक 3.46.22  |
उर्वश्युवाच
यथा मे चित्रसेनेन कथितं मनुजोत्तम।
तत् तेऽहं सम्प्रवक्ष्यामि यथा चाहमिहागता॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| उर्वशी बोली - पुरुषोत्तम! मैं तुम्हें चित्रसेन द्वारा दिया गया संदेश तथा जिस उद्देश्य से मैं यहाँ आई हूँ, वह बता रही हूँ। |
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| Urvashi said - Purushottama! I am telling you the message given to me by Chitrasena and the purpose for which I have come here. |
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