Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.46.16: वह अप्सरा निर्मल मुस्कान से सुशोभित होकर तथा मन और वायु के समान तीव्र गति से चलने वाली, क्षण भर में पाण्डुपुत्र अर्जुन के महल में पहुँच गई।   |   mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.46.16 
तत: प्राप्ता क्षणेनैव मन:पवनगामिनी।
भवनं पाण्डुपुत्रस्य फाल्गुनस्य शुचिस्मिता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वह अप्सरा निर्मल मुस्कान से सुशोभित होकर तथा मन और वायु के समान तीव्र गति से चलने वाली, क्षण भर में पाण्डुपुत्र अर्जुन के महल में पहुँच गई।
 
That Apsara, adorned with a pure smile and moving as fast as the mind and the wind, reached the palace of Arjuna, the son of Pandu, in a moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)