Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.46.14-15: उस कामुक अप्सरा की आकृति अनेक आश्चर्यों से युक्त स्वर्ग में सिद्धों, चारणों और गन्धर्वों के लिए भी दर्शनीय हो रही थी। दुबली-पतली उर्वशी अत्यंत सुन्दर मेघ के समान सुन्दर श्याम रंग का शाल ओढ़े हुए बादलों से आच्छादित चन्द्रलेखा के समान आकाश में विचरण कर रही थी। | mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस कामुक अप्सरा की आकृति अनेक आश्चर्यों से युक्त स्वर्ग में सिद्धों, चारणों और गन्धर्वों के लिए भी दर्शनीय हो रही थी। दुबली-पतली उर्वशी अत्यंत सुन्दर मेघ के समान सुन्दर श्याम रंग का शाल ओढ़े हुए बादलों से आच्छादित चन्द्रलेखा के समान आकाश में विचरण कर रही थी।
The figure of that sensuous Apsara was becoming worth seeing even for Siddhas, Charanas and Gandharvas in the heaven filled with many wonders. Slender Urvashi was walking in the sky like Chandralekha covered with clouds, wearing a beautiful dark colored shawl like a very fine cloud.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥