Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.46.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् कृतज्ञ गन्धर्वराज चित्रसेन को विदा करके, पवित्र मुस्कान के साथ उर्वशी अर्जुन से मिलने के लिए उत्सुक होकर स्नान करने लगी॥1॥ | mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् कृतज्ञ गन्धर्वराज चित्रसेन को विदा करके, पवित्र मुस्कान के साथ उर्वशी अर्जुन से मिलने के लिए उत्सुक होकर स्नान करने लगी॥1॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter, bidding farewell to the grateful Gandharva king Chitrasen, Urvashi with the holy smile took bath, eager to meet Arjuna. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥